अहिल्या

इस धरा की बात है खासखुद भगवान उतरे यहां सबके साथ।जब कभी अंधकार घिर आता है,मानव नीचे गिरता जाता है,भूमि से हरि को ही पुकारता है,अधर्म से मुक्ति को अकुलाता है।त्रेता में जब यह नाद हुआ,पाप से सत्कर्म जब बर्बाद हुआभीक्षण आंधी उड़ती आती थी,सात्विकता नष्ट कर ले जाती थी।ऋषियों का जीना दूभर हुआ जाता… Continue reading अहिल्या

मृत्यु से मुलाकात

निकल पड़ा मैं घर से किसी बात पे,क्रोधित था मन उस दिन दुनिया के हालात पे,उचटा हुआ मन लिए पहुंचा एक सूने मैदान में,सहसा सन्नाटे से ठिठका, हुआ थोड़ा हैरान मैं । दूर दूर तक न कोई मनुष्य नज़र आता था,न ही आकाश से कोई पंछी चहचहाता था,रोशनी भी धीरे धीरे ढल रही थी,धूल समेटे… Continue reading मृत्यु से मुलाकात

विपक्ष की बात

भारतवर्ष की भूमि परजब शीत ऋतु लहराती थी,असावधान बैठी देहों पर,क्रूरता बरसाती जाती थी।हंसते-रोते, चलते-सोते रोजमर्रा के जीवन ढोते,लोगों के जीवन मे एक दिन आया ऐसा निराला थालोकतंत्र का गान करके कुछ जनों ने,देश के हृदय पर तेज़ चुभोया एक भाला था।सुबह का अखबार जैसे अपने साथ उल्टी स्वतंत्रता लाया था,लगता था ठंड ने कुछ… Continue reading विपक्ष की बात

Chances

Take your chances, O' lonely soul, Lest the passions are abating, Seek the comforts of present not the past, for The time rushes while these keep on debating. Worried of the chances that you will lose? But equal are that of winning, if not more, What use is such caution in what to choose? When… Continue reading Chances

You should have a Wife?

When I was happy without any strife,when I had no qualms with life.Then it was deemed by people to advise,"Boy, you should have a wife!" I search for joy and for truth,and go for adventures in my youth.And yet it was deemed by them to be so rife,so people told me to have a wife.… Continue reading You should have a Wife?

आज़ाद

कहते हैं कि भारतवर्ष में आज़ादी की आजकल नई घटा है छायी,जब अपने ही वीर सपूतों की निंदा करने की कुछ लोगों ने है स्वतंत्रता पायी।अपने ही हाथों जिनसे मातृभूमि का गला घोंटा जाता है,उन लोगों को आजकल देश में आज़ाद कहा जाता है। रहते हैं जो उच्च दबाव में, तूफानों में, वीरानों में, शून्य… Continue reading आज़ाद

पाप की परिभाषा

आज के कलियुग में जहाँपाप-व्यभिचार सदा-सद पलता हैइस शहर-उस शहर, हर नगर, हर देश सेहंसते-मुस्कराते, हाथ हिलाते, सिर उठा निकलता है।राह चलते हुए राहगीरों को वह पकड़ता हैहर किसी के मन को वह अंततः जकड़ता हैऔर गलत राह पर ले जा कर वह अकड़ता है(जो मन मे एक बार पाप को बसा लेता है तो… Continue reading पाप की परिभाषा

The Cloud’s Flight

‘Pittar-pattar’ the rain drops fall,From the clouds, its journey small,towards the earth, smelling fresh.It falls on the moor beyond that lifeless streamwhere darker shadows loom in moonlight beams. The drops form the pond,Smaller, bigger; growing in bondFalling in pit with each other,Unity’s armour they donned.Dark clouds gather above, they grow in size,After joining one another,… Continue reading The Cloud’s Flight